कई कारणों से आ रही है चीनी के उत्पादन में गिरावट
06-Jan-2025 05:43 PM
नई दिल्ली । शीर्ष उद्योग संस्था- इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (इस्मा) के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि चालू मार्केटिंग सीजन के शुरुआती तीन महीनों में यानी अक्टूबर-दिसम्बर 2024 के दौरान चीनी का घरेलू उत्पादन घटकर 95.40 लाख टन पर अटक गया जो वर्ष 2023 की समान अवधि के उत्पादन 113.01 लाख टन से 15.6 प्रतिशत कम है। आगामी समय में भी उत्पादन की स्थिति में विशेष सुधार आने की उम्मीद कम है।
उद्योग समीक्षकों के अनुसार कुछ खास करणों से चीनी के उत्पादन में गिरावट आ रही है। पहली बात तो यह है कि इस बार गन्ना की क्रशिंग काफी कम चीनी मिलों में हो रही है।
महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे अग्रणी उत्पादक राज्यों के साथ-साथ तमिलनाडु में भी चीनी मिलों की क्रियाशीलता घटी है। अनेक चीनी मिलें इस बार चालू नहीं हो पाई।
दूसरा कारण यह है कि पिछले सीजन के मुकाबले वर्तमान मार्केटिंग सीजन में मिलर्स चीनी के बजाए एथनॉल के उत्पादन पर विशेष ध्यान दे रहे हैं क्योंकि एक तो सरकार से चीनी के निर्यात की अनुमति मिलने की संभावना क्षीण पड़ गई है और दूसरे, सरकार चीनी के एक्स फैक्ट्री न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोत्तरी करने में टाल मटोल कर रही है।
उद्योग के पास पिछले सीजन में उत्पादित चीनी का विशाल स्टॉक मौजूद है। 2023-24 के सीजन में एथनॉल में उत्पादन में 21.50 लाख टन चीनी का इस्तेमाल हुआ था जबकि 2024-25 के वर्तमान सीजन में लगभग 40 लाख टन चीनी का उपयोग होने की संभावना है।
इस बार गन्ना के उत्पादन में काफी कमी आने की संभावना है जबकि एथनॉल निर्माण में इसकी ज्यादा खपत होगी। इसके फलस्वरूप खाद्य उद्देश्य के लिए चीनी के उत्पादन हेतु गन्ना की उपलब्धता काफी घट सकती है।
पिछले साल 31 दिसम्बर तक 512 चीनी मिलों में गन्ना की क्रशिंग शुरू हो गई थी लेकिन 2024 में यह संख्या 493 तक ही पहुंच सकी।
