जीरा कीमतों में मंदे की संभावना नहीं
12-Jun-2026 07:44 PM
नई दिल्ली। जानकार सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में जीरे के भाव न्यूनतम स्तर पर चल रहे हैं। इन भावों पर हाल-फिलहाल अधिक मंदे की संभावना नहीं है। आगामी दिनों में बाजार 3/5 रुपए मन्दा-तेजी के बीच बने रहेंगे। हालांकि उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर जीरे की आवक सीमित रह गई है। मगर लोकल एवं निर्यात व्यापार कम होने के कारण भाव दबे हुए हैं। उल्लेखनीय है कि मिडिल ईस्ट देशों में युद्ध के चलते विगत कुछ समय से जीरे का निर्यात प्रभावित हो रहा है। अभी हाल-फिलहाल निर्यात मांग बढ़ने की कोई संभावना भी नहीं है। क्योंकि चालू माह के अंत तक चीन में नए जीरे की आवक शुरू हो जाएगी और इस वर्ष चीन में जीरा उत्पादन गत वर्ष की तुलना में 5/10 प्रतिशत अधिक होने के समाचार मिल रहे हैं। जबकि जुलाई माह में टर्की एवं सीरिया में नए जीरे की आवक शुरू हो जाएगी। जिस कारण से भारतीय जीरे का निर्यात कम ही रहेगा।
चालू सीजन के दौरान देश में जीरे का उत्पादन गत वर्ष की तुलना में कम रहा। हालांकि राजस्थान में उत्पादन गत वर्ष की तुलना में अधिक रहा लेकिन गुजरात में जीरा उत्पादन गत वर्ष की तुलना में कम होने के समाचार मिल रहे है। प्राप्त जानकारी के अनुसार गत वर्ष गुजरात में जीरे का उत्पादन 44/45 लाख बोरी का रहा था जोकि इस वर्ष घटकर 32/34 लाख बोरी का रह गया। जबकि राजस्थान में इस वर्ष उत्पादन 57/58 लाख बोरी होने के व्यापारिक अनुमान लगाए गए हैं गत वर्ष राजस्थान में उत्पादन 51/52 लाख बोरी का माना गया है।
आवक
वर्तमान में उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर जीरे की आवक समान्य स्तर पर आ गई है। गुजरात की प्रमुख मंडी ऊंझा में आवक 10/11 हजार बोरी की हो रही है जबकि राजकोट एवं गोंडल में आवक 800/1000 बोरी की चल रही है। राजस्थान की मेडता मंडी में आवक 2500/3000 बोरी एवं नागौर में 1500/2000 बोरी की चल रही है। जोधपुर में आवक 1200/1500 बोरी की रह गई है। सूत्रों का कहना है कि गुजरात की मंडियों में कुल उत्पादन का लगभग 75/80 प्रतिशत माल मंडियों में आ चुका है जबकि राजस्थान में 50/60 प्रतिशत माल मंडियों में आने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि गुजरात की मंडियों में अभी तक लगभग 28/30 लाख बोरी जीरे की आवक हो चुकी है। जबकि राजस्थान की मंडियों में 20/22 लाख बोरी जीरा आने के अनुमान लगाए जा रहे हैं।
मन्दा-तेजी
जानकार सूत्रों का कहना है कि जीरे की वर्तमान कीमतों में मंदे की संभावना नहीं है क्योंकि एक ओर जहां मंडियों में आवक घट गई है। वही दूसरी तरफ आगामी दिनों में लोकल मांग में सुधार होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। छिटपुट मात्रा में निर्यात भी जारी रहेगा। वर्तमान में उत्पादन केन्द्रों की मंडियों पर जीरे के भाव 175/200 रुपए प्रति किलो चल रहे हैं। इन भावों में अभी 3/5 रुपए प्रति किलो का मन्दा-तेजी चलता रहेगा। लेकिन अगस्त-सितम्बर माह में भाव बढ़ने की संभावना है।
निर्यात
वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल-मार्च) के दौरान एक ओर जहां मात्रात्मक रूप में जीरे का निर्यात 14 प्रतिशत घटा है वहीं निर्यात भाव कम मिलने के कारण निर्यात से प्राप्त आय में 25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 के दौरान जीरे का निर्यात 196800 टन का रहा और निर्यात से प्राप्त आय 4611.15 करोड़ की रही। जबकि वर्ष 2024-25 के दौरान जीरा का निर्यात 229881 टन का रहा था और निर्यात से प्राप्त आय 6178.86 करोड़ की रही थी।
