जलवायु परिवर्तन के असर से गेहूं, धान की उपज 10 प्रतिशत तक घटने की आशंका

10-Jan-2025 07:48 PM

नई दिल्ली । वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन एवं ग्लोबल वार्मिंग के कारण भारत में चावल तथा गेहूं के उत्पादन में 6 से 10 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।

जलवायु परिवर्तन का एक और असर यह पड़ रहा है कि तटवर्ती क्षेत्रों में समुद्र का पानी गर्म होने लगा है जिससे मछलियों एवं अन्य जलीय जीवों को गहरे समंदर के ठंडे पानी की ओर जाने के लिए विवश होना पड़ रहा है। इससे मछुआरों की आमदनी एवं कारोबार पर असर पड़ने की संभावना है। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार 2023-24 के सीजन में गेहूं का घरेलू उत्पादन बढ़कर 1132.90 लाख टन की ऊंचाई पर पहुंच गया जो वैश्विक उत्पादन का करीब 14 प्रतिशत रहा। इसी तरह चावल का उत्पादन भी बढ़कर 1370 लाख टन से ऊपर पहुंच गया।

देश के 140 करोड़ लोगों के लिए धान (चावल) और गेहूं मुख्य खाद्यान्न है। 80 करोड़ से अधिक लोगों को सरकार की ओर से खाद्यान्न का मुफ्त वितरण किया जा रहा है। 

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक का कहना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से चावल तथा गेहूं की उपज दर में अलग-अलग 6 से 10 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है जिससे किसानों एवं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

उनके अनुसार ग्लोबल वार्मिंग के कारण पश्चिमी विक्षोभ की बारम्बारता एवं ताकत में कमी आ रही है। भू मध्य सागरीय क्षेत्र से उत्पन्न होने वाले इस मौसम तंत्र की वजह से जाड़े के दिनों में देश के पश्चिमोत्तर राज्यों में बारिश होती है और पर्वतीय प्रांतों में हिमपात होता है।

राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में गेहूं का सर्वाधिक उत्पादन होता है। ग्लोबल वार्मिंग से हिमपात क्षेत्र एवं मैदानी इलाकों में पानी का संकट उत्पन्न हो सकता है।