गेहूं की उपलब्धता कम एवं मांग मजबूत रहने से भाव ऊंचा
09-Jan-2025 08:28 PM
नई दिल्ली । प्रमुख उत्पादक राज्यों की महत्वपूर्ण मंडियों में गेहूं की आपूर्ति लगातार घटती जा रही है। अत्यन्त ऊंचे बाजार भाव तथा भंडारण सीमा के लागू होने के बावजूद आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थित में सुधार नहीं आने से स्पष्ट पता चलता है कि किसानों एवं व्यापारियों / स्टॉकिस्टों के पास गेहूं का सीमित स्टॉक मौजूद है जबकि पंजाब-हरियाणा सहित अन्य प्रमुख उत्पादक राज्यों में इसके नए माल की आवक अप्रैल से पहले जोर नहीं पकड़ पाएगी।
इसका मतलब यह हुआ कि अगर केन्द्र सरकार ने प्रभावी ढंग से बाजार में हस्तक्षेप नहीं किया तो जनवरी से मार्च 2025 तक गेहूं के दाम में ऊंचे स्तर पर ही थोड़ा-बहुत उतार-चढ़ाव आ सकता है।
सरकार खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के अंतर्गत केवल 4-5 लाख टन गेहूं की मासिक बिक्री कर रही है। दिसम्बर 2024 से यह योजना दोबारा चालू हुई है जो मार्च 2025 के अंत तक जारी रहेगी।
इस अवधि के लिए कुल 25 लाख टन गेहूं की बिक्री का कोटा आवंटित किया गया है जबकि जरूरत इससे काफी अधिक है। भारत ब्रांड आटा का दाम भी 275 रुपए से बढ़ाकर 300 रुपए प्रति 10 किलो नियत किया गया है।
साप्ताहिक ई-नीलामी में एक लाख टन गेहूं की बिक्री का ऑफर दिया जाता है और मिलर्स-प्रोसेसर्स द्वारा इसकी लगभग सम्पूर्ण मात्रा की खरीद कर ली जाती है। इस ऑफर का स्तर बढ़ाए जाने की आवश्यकता है लेकिन समस्या यह है कि स्वयं सरकार के पास गेहूं का लम्बा-चौड़ा अधिशेष स्टॉक नहीं है
इसलिए वह स्वछंदता के साथ कोई निर्णय लेने की स्थिति में नहीं है। गेहूं की बोआई समाप्त हो चुकी है और जब तक फसल की कटाई-तैयारी नहीं हो जाती तब तक उत्पादन के बारे में संशय बरकरार रहेगा क्योंकि अक्सर फरवरी-मार्च के प्रतिकूल मौसम से फसल को नुकसान होता रहा है।
