गेहूं की खरीद का व्यावहारिक लक्ष्य

11-Jan-2025 11:35 AM

गत दो वर्षों के कटु अनुभव को ध्यान में रखते हुए केन्द्र सरकार ने प्रमुख उत्पादक राज्यों के खाद्य सचिवों के साथ गहन विचार-विमर्श करके 2024-25 के वर्तमान रबी सीजन के लिए 300 लाख टन गेहूं की खरीद का आरंभिक लक्ष्य निर्धारित किया है जिसे सामान्यतः व्यावहारिक माना जा रहा है।

ध्यान देने वाली बात है कि वर्ष 2024 में 300-320 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन वास्तविक खरीद 266 लाख टन तक ही पहुंच सकी।

इससे पूर्व 2022 में भी 341.50 लाख टन के निर्धारित लक्ष्य की तुलना में महज 262 लाख टन गेहूं खरीदा जा सका था जबकि वर्ष 2021 में खरीद की मात्रा 190 लाख टन के आसपास सिमट गई थी।

सरकार प्रत्येक वर्ष गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में इस उम्मीद से इजाफा करती है कि किसानों को उत्पादन बढ़ाने का प्रोत्साहन मिलेगा और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को केन्द्रीय पूल के लिए अधिक से अधिक मात्रा में इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न की खरीद करने में सफलता प्राप्त होगी।

लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है क्योंकि गेहूं का घरेलू बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊंचा रहता है या फिर किसान आगामी समय में दाम बढ़ने की उम्मीद से गेहूं की बिक्री सीमित कर देते हैं और इसका स्टॉक दबाने का प्रयास करते हैं।

इस बार तो स्थिति और भी विषम है क्योंकि सभी उत्पादक राज्यों में गेहूं का भाव सरकारी समर्थन मूल्य से ऊंचा चल रहा है।

मालूम हो कि 2024-25 सीजन के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 150 रुपए बढ़ाकर 2425 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया गया है जबकि राजस्थान एवं मध्य प्रदेश में किसानों को 125 रुपए प्रति क्विंटल की दर से अतिरिक्त बोनस भी दिया जाएगा। इससे वहां गेहूं का भाव स्वाभाविक रूप से ऊंचा हो जाएगा।

सरकार ने चालू रबी सीजन के दौरान 1150 लाख टन गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है जबकि इसके लिए मौसम का पूरी तरह अनुकूल होना आवश्यक है।

हालांकि इस बार गेहूं का रकबा सुधरकर 319 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा है और आमतौर पर अभी तक मौसम की हालत भी अनुकूल ही है लेकिन मध्य जनवरी से मध्य अप्रैल तक का मौसम गेहूं के उत्पादन के लिए निर्णायक साबित होगा।

सरकार को उत्पादन का लक्ष्य थोड़ा छोटा रखना चाहिए था क्योंकि वास्तविक पैदावार सरकारी आंकड़ों से काफी कम होती है। इससे बाजार में असमंजस का माहौल बना रहता है।