गेहूं की आपूर्ति एवं उपलब्धता बेहतर होने से कीमतों पर दबाव संभव
14-Mar-2026 12:27 PM
नई दिल्ली। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में गेहूं की अगैती बिजाई वाली फसल की कटाई-तैयारी आरंभ हो गई है
और शुरुआती सकेतों से पता चलता है कि इसकी औसत उपज दर कुछ ऊंची रह सकती है। राष्ट्रीय स्तर पर गेहूं का बिजाई क्षेत्र भी पिछले साल के 328.04 लाख हेक्टेयर से 6.13 लाख हेक्टेयर बढ़कर इस बार 334.17 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार 2024-25 के रबी सीजन में 1179.40 लाख टन गेहूं का रिकॉर्ड घरेलू उत्पादन हुआ था जबकि 2025-26 के मौजूदा सीजन में उत्पादन और भी बढ़कर 1202.10 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच सकता है।
यदि वह अनुमान सही साबित होता है तो यह पहला अवसर होगा जब गेहूं का उत्पादन 12 करोड़ टन पर पहुंचेगा। देश के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि होगी।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास पहले से ही गेहूं का विशाल स्टॉक मौजूद है जबकि इस वर्ष 303 लाख टन की खरीद का लक्ष्य रखा गया है।
चूंकि गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया गया है जबकि थोक मंडी भाव इससे नीचे चल रहा है इसलिए गेहूं की सरकारी खरीद नियत लक्ष्य तक पहुंचने की उम्मीद की जा रही है।
इसके बाद भी किसानों के पास गेहूं का भारी-भरकम विपणन योग्य अधिशेष स्टॉक मौजूद रहेगा। ऐसी हालत में खुले बाजार में गेहूं की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम रहने से कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।
सरकार द्वारा 25 लाख टन गेहूं एवं 10 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी जा चुकी है लेकिन इसका दाम वैश्विक बाजार मूल्य से ऊंचा होने के कारण अनुबंध में समस्या आ रही है। यदि कीमत 300-400 रुपए प्रति क्विंटल नीचे आ जाए तो निर्यात संभव हो सकेगा।
