गेहूं एवं मक्का के निर्यात में भारी गिरावट

15-Dec-2023 07:50 PM

नई दिल्ली । गेहूं के व्यापारिक निर्यात पर मई 2022 से ही प्रतिबंध लगा हुआ है और केवल सरकारी स्तर पर सीमित मात्रा में इसका शिपमेंट किया जा रहा है।

मक्का के निर्यात पर कोई पाबंदी नहीं लगी हुई है लेकिन इसका ऑफर मूल्य ऊंचा एवं गैर प्रतिस्पर्धी होने से कुछ आयातक देशों में मांग कमजोर पड़ गई।  

सरकारी एजेंसी- एपीडा के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष के शुरूआती सात महीनों में यानी अप्रैल-अक्टूबर 2023 के दौरान देश से केवल 79 हजार टन गेहूं का निर्यात हो सका जो अप्रैल-अक्टूबर 2022 के निर्यात 46.56 लाख टन की तुलना में नगण्य रहा। इसी तरह इसकी निर्यात आमदनी भी 156.70 करोड़ डॉलर से 98.44 प्रतिशत लुढ़ककर 2.30 करोड़ डॉलर पर सिमट गई। 

मोटे अनाजों (मुख्यत: मक्का) का निर्यात प्रदर्शन इतना कमजोर तो नहीं रहा मगर इसके शिपमेंट में भी गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-अक्टूबर 2022 में देश में 16.59 लाख टन मोटे अनाजों का निर्यात हुआ था जो अप्रैल-अक्टूबर 2023 में 3 लाख टन घटकर 13.58 लाख टन पर अटक गया।

इसी तरह समीक्षाधीन अवधि के दौरान इसकी निर्यात आय भी 57 करोड़ डॉलर से 29 प्रतिशत घटकर 40.40 करोड़ डॉलर पर अटक गई। दरअसल भारतीय मक्का खासकर दक्षिण-पूर्व एशिया में कुछ हद तक गैर प्रतिस्पर्धी हो गया।

पाकिस्तान ने अपने मक्के को कम दाम पर बेचने का प्रयास किया क्योंकि उसकी क्वालिटी कमजोर थी। गेहूं का घरेलू बाजार भाव ऊंचा चल रहा है और इसकी उपलब्धता भी कम है इसलिए निकट भविष्य में इसके व्यापारिक निर्यात की अनुमति दिए जाने की संभावना नहीं है।  जहां तक मक्का का सवाल है तो इसकी खरीफ कालीन फसल की आवक तथा रबी कालीन फसल की बिजाई हो रही है।