फसल की कटाई में देरी एवं परिवहन में बाधा के कारण बिहार से मक्का की आपूर्ति धीमी
01-Jun-2026 05:47 PM
बेगूसराय। बिहार को रबी कालीन मक्का का सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य माना जाता है। इस वर्ष वहां बिजाई सामान्य हुई और मौसम की हालत भी संतोषजनक रही जिससे उत्पादन कुछ बेहतर होने के आसार हैं।
बिहार से देश के विभिन्न राज्यों को भारी मात्रा में मक्का की आपूर्ति की जाती है और कुछ माल विदेशों- खासकर बांग्ला देश को निर्यात भी किया जाता है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से राज्य के प्रमुख उत्पादक जिलों में मौसम की हालत अनुकूल नहीं होने से फसल की कटाई-तैयारी में विलम्ब हो रहा है और मंडियों में माल की समुचित आवक नहीं होने से व्यापारियों / अपूर्तिकताओं को अपने क्लाइंट्स को सही समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ रहा है। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता को देखते हुए मौसम विभाग ने एक बार फिर बिहार के 6 जिलों में बारिश होने की संभावना व्यक्त की है जिससे मक्का में नमी का अंश बढ़ सकता है।
समझा जाता है कि राष्ट्रीय स्तर पर गत सप्ताह तक 1864 रेलवे रैक में मक्का की कुल मांग लंबित थी जिसमें से केवल बिहार में 88 प्रतिशत या 1637 रेल रैक की मांग पेंडिंग थी। राज्य में न केवल रेलवे रैक पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं है बल्कि सड़क परिवहन का खर्च भी बढ़ गया है। बिहार से उत्तर प्रदेश को 404 रैक में मक्का भेजा जाना है जबकि पंजाब को 319, उत्तराखंड को 296 एवं तमिलनाडु को 285 रैकों में मक्का की आपूर्ति की जानी है। इसके साथ-साथ बांग्ला देश के लिए भी 56 रैकों में मक्का की मांग लंबित है।
हालांकि रबी सीजन के दौरान बिहार सहित कई अन्य राज्यों में भी मक्का का अच्छा उत्पादन होता है मगर पशु आहार, पॉल्ट्री फीड, स्टार्च निर्माण एवं एथनॉल उत्पादन का ध्यान बिहार के मक्का पर ही केन्द्रित रहता है। तमिलनाडु जैसे सुदूर दक्षिणी प्रान्त के खरीदार यदि बिहार से मक्का की भारी लिवाली कर रहे है तो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बिहारी मक्का पर उसकी निर्भरता बरकरार है। अगर बिहार से मक्का की निकासी में बाधा पड़ती है तो प्रमुख खपतकर्ता क्षेत्रों में इसकी कीमतों में कुछ तेजी आ सकती है।
