एथनॉल उद्योग की मांग से मक्का का भाव मजबूत रहने की संभावना

09-Jan-2025 05:57 PM

नई दिल्ली । लम्बे समय तक नीचे रहने के बाद अब मक्का का भाव बढ़कर सरकारी समर्थन मूल्य से ऊपर पहुंचा है जिसके लिए एथनॉल उद्योग में तेजी से बढ़ती मांग एवं घरेलू उत्पादन में जारी स्थिरता को प्रमुख कारक माना जा सकता है।

एथनॉल निर्माण में पिछले साल से ही मक्का का इस्तेमाल तेजी से बढ़ना आरंभ हो गया था जबकि चालू वर्ष के दौरान इसमें और भी बढ़ोत्तरी होने की संभावना है। दूसरी ओर इसके उत्पादन में अपेक्षित बढ़ोत्तरी नहीं हो रही है।

खरीफ कालीन मक्के की आवक अभी हो रही है जबकि रबी कालीन फसल की कटाई-तैयारी मार्च-अप्रैल में शुरू होगी। 

मक्का का न्यूतनम समर्थन मूल्य 2024-25 सीजन के लिए 2225 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया गया है जबकि अधिकांश प्रमुख उत्पादक प्रांतों में भाव इससे ऊपर या इसके आसपास चल रहा है।

यह स्थिति उत्पादों के लिए तो लाभप्रद है लेकिन पॉल्ट्री उद्योग को पसंद नहीं आ रही है। इसका कहना है कि पॉल्ट्री उद्योग में मक्का की ऊंची कीमतों के कारण लागत खर्च काफी बढ़ गया है। 

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2020 में मक्का का भाव बिहार में घटकर 1100/1200 रुपए क्विंटल रह गया था जो 1850 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य से बहुत नीचे था।

अब उसमें लगभग दोगुनी बढ़ोत्तरी हो चुकी है। सरकार चाहती है कि किसानों को मक्का का कम से कम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) अवश्य प्राप्त हो ताकि इसकी खेती के प्रति उसका उत्साह एवं आकर्षण बरकरार रहे।

ऊंचे दाम को देखते हुए किसान अपने मक्के की बिजाई में अच्छी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दिसम्बर 2024 में 16 लाख टन से अधिक मक्का की घरेलू आवक हुई लेकिन इसके बावजूद कीमतों में नरमी का माहौल नहीं बना।

इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि मक्का में औद्योगिक मांग काफी मजबूत है और आगे भी बनी रहेगी। 2024-25 के मार्केटिंग सीजन के लिए तेल विपणन कंपनियों ने 837 करोड़ लीटर एथनॉल का कोटा आवंटित किया है जिसमें मक्का से निर्मित एथनॉल की भागीदारी 431.10 करोड़ लीटर या 51.52 प्रतिशत नियत की गई है।