एथनॉल में इस्तेमाल हेतु 17 लाख टन चीनी का कोटा निर्धारित

16-Dec-2023 03:52 PM

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने पहले 2023-24 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन में एथनॉल के निर्माण में गन्ना जूस एवं शुगर सीरप के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी लेकिन चीनी उद्योग द्वारा इस निर्माण का विरोध किए जाने के बाद सरकार ने अब बीच का फार्मूला अपनाते हुए एथनॉल के निर्माण में 17 लाख टन चीनी के समतुल्य गन्ना के इस्तेमाल की अनुमति प्रदान की है।

इस आशय की अधिसूचना शीघ्र ही जारी किए जाने की संभावना है। उद्योग समीक्षकों के अनुसार 2022-23 के मार्केटिंग सीजन के दौरान 38 लाख टन चीनी के समतुल्य गन्ना का उपयोग एथनॉल निर्माण में किया गया था। 

वरिष्ठ आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सरकार जल्दी ही एथनॉल निर्माण के लिए 17 लाख टन चीनी के डायवर्जन की अनुमति देने की अधिसूचना जारी करेगी जिसमें स्पष्ट रूप से इस बात का उल्लेख किया जाएगा कि इसमें गन्ना जूस तथा शीरा की कितनी-कितनी मात्रा शामिल होगी।

उद्योग समीक्षकों के अनुसार प्रथम चरण की बिडिंग प्रक्रिया के दौरान चीनी मिलर्स एवं डिस्टीलर्स तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को 260 करोड़ लीटर एथनॉल की आपूर्ति करने पर सहमत हुए थे जिसमें 130 करोड़ लीटर का उत्पादन सीधे गन्ना जूस से तथा शेष 130 करोड़ लीटर एथनॉल का निर्माण शीरा से किया जाना था।

इस अनुबंध को पूरा करने के लिए एथनॉल निर्माण में 30 लाख टन चीनी के उपयोग की आवश्यकता पड़ सकती थी लेकिन सरकार ने बीच से ही प्रतिबंध लगातार इसमें व्यवधान उत्पन्न कर दिया।

लेकिन जब चीनी उद्योग एवं महाराष्ट्र सरकार ने केन्द्र के निर्णय पर चिंता एवं असंतोष जाहिर किया तब सरकार को कुछ रियायत देने का निर्णय लेना पड़ा।

चीनी उद्योग का कहना है कि गन्ना किसानों के बकाए का अधिकांश भुगतान एथनॉल की कमाई से पूरा किया जाता है। चीनी का उत्पादन महज 5-6 महीनों तक होता है जबकि इसके स्टॉक की बिक्री साल भर तक जारी रहती है इसलिए मिलर्स को एक साथ इतनी रकम प्राप्त नहीं होती है कि वे गन्ना मूल्य बकाए का सही समय पर भुगतान कर सके। इस बीच एथनॉल की बिक्री से जो राशि मिलती है उसका उपयोग भुगतान में किया जाता है।