एनएफसीएसएफ द्वारा चीनी का उत्पादन घटकर 270 लाख टन पर सिमटने का अनुमान
27-Jan-2025 01:20 PM
नई दिल्ली। सहकारी चीनी मिलों की अग्रणी संस्था- नेशनल फेडरेशन ऑफ को ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (एनएफसीएसएफ) ने 2023-24 सीजन की तुलना में 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान चीनी का घरेलू उत्पादन 319 लाख टन से 49 लाख टन लुढ़ककर 270 लाख टन पर सिमटने का अनुमान लगाया है जो पूर्व में लगाए अनुमान 280 लाख टन से भी 10 लाख टन कम है।
फेडरेशन के अनुसार समीक्षाधीन अवधि के दौरान चीनी का उत्पादन उत्तर प्रदेश में 10365 लाख टन से घटकर 93 लाख टन, महाराष्ट्र में 110.20 लाख टन से लुढ़ककर 86 लाख टन तथा कर्नाटक में 53 लाख टन से गिरकर 41 लाख टन रह जाने की संभावना है।
इससे पूर्व उत्तर प्रदेश में 98 लाख टन, महाराष्ट्र में 87 लाख टन एवं कर्नाटक में 45 लाख टन चीनी के उत्पादन का अनुमान लगाया गया था।
वर्ष 2023 में जो भयंकर सूखा पड़ा था उसका असर अब भी देखा जा रहा है। गन्ना की कुछ श्रेणी 10-12 महीनों में तैयार होने वाली फसल मानी जाती है।
पिछले सीजन की तुलना में चालू सीजन के दौरान न केवल गन्ना की पैदावार घटने की संभावना है बल्कि गन्ना से चीनी की औसत रिकवरी दर में भी कमी आने के संकेत मिल रहे है।
गन्ना का वजन भी घट गया है। महाराष्ट्र में स्थिति ज्यादा गंभीर दिखाई पड़ रही है। समझा जाता है कि गन्ना के अभाव में वहां इसकी क्रशिंग का सीजन मार्च के अंत तक समाप्त हो सकता है।
उधर उत्तर प्रदेश में रेड रोट फंगल रोग के आघात से गन्ना की फसल प्रभावित होने की सूचना मिल रही है। इसके साथ-साथ वहां टॉप शूट वोरर नामक कीट का प्रकोप भी देखा जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में सी ओ- 0238 प्रजाति के गन्ना की खेती अधिक क्षेत्रफल में होती है और रेड रोट कीट का प्रकोप भी इसी किस्म पर ज्यादा देखा जा रहा है।
हालांकि वहां इस प्रजाति में होती है और रेड रोट कीट का प्रकोप भी इसी किस्म पर ज्यादा देखा जा रहा है। हालांकि वहां इस प्रजाति के विकल्प के रूप में कुछ अन्य किस्में भी उपलब्ध हैं मगर किसानों में इसकी लोकप्रियता ज्यादा नहीं है।
फेडरेशन के अनुसार 2024-25 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन में 80.23 लाख टन के पुराने स्टॉक एवं 270 लाख टन के उत्पादन के साथ चीनी की उपलब्धता 350.23 लाख टन पर पहुंचेगी।
इसमें से 295 लाख टन का घरेलू उपयोग एवं 10 लाख टन का निर्यात होने पर मार्केटिंग सीजन के अंत में उद्योग के पास लगभग 45 लाख टन चीनी का स्टॉक (अधिशेष) बच सकता है जो 1.8 माह की खपत के समतुल्य है। वैसे 2025-26 के सीजन में चीनी का घरेलू उत्पादन शानदार होने की उम्मीद है।
