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13-Oct-2026 05:52 PM
नई दिल्ली। धान के रकबे में करीब 3.6 प्रतिशत की कमी आने तथा मानसून की बारिश कम होने से खरीफ कालीन चावल का उत्पादन घटने की आशंका है। इससे कीमतों में तेजी की गुंजाईश बन सकती है। दूसरी ओर भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास चावल का विशाल स्टॉक मौजूद है जबकि आगे इसमें और भी बढ़ोत्तरी होती जाएगी क्योंकि नए धान की आवक एवं सरकारी खरीद शुरू हो चुकी है। कीमतों में तेजी आने पर सरकार प्रभावी ढंग से बाजार में हस्तक्षेप करने में सक्षम हो जाएगी।
लेकिन ध्यान देने वाली बात है कि केन्द्रीय बफर स्टॉक के लिए अधिकांशतः सामान्य श्रेणी के गैर बासमती धान-चावल की खरीद होती है जबकि 'ए' ग्रेड के या फाइन क्वालिटी का चावल बहुत कम खरीदा जाता है। बासमती धान की सरकारी खरीद आमतौर पर नहीं होती है क्योंकि इसके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का निर्धारण नहीं किया जाता है।
पिछले साल की तुलना में इस वर्ष फाइन क्वालिटी के गैर बासमती धान और साथ ही साथ बासमती धान के क्षेत्रफल में भी कुछ गिरावट आई है। पंजाब में बासमती का रकबा लगभग स्थिर रहा मगर हरियाणा में कुछ घट गया। सुपर फाइन तथा फाइन ग्रेड के धान का उत्पादन क्षेत्र तेलंगाना, कर्नाटक एवं छत्तीसगढ़ में घटने की सूचना मिल रही है।