चीनी का उत्पादन घरेलू मांग से ज्यादा होने पर भी निर्यात की अनुमति में संदेह
10-May-2024 06:08 PM
नई दिल्ली । हालांकि उत्पादन एवं स्टॉक के आंकड़ों के आधार पर स्वदेशी उद्योग केन्द्र सरकार से 2023-24 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन में 20 लाख टन चीनी के निर्यात की स्वीकृति देने का आग्रह कर रहा है मगर तत्काल सरकार द्वारा इस पर सकारात्मक निर्णय लिए जाने में संदेह है।
अभी लोक सभा चुनाव की प्रक्रिया जारी है और सरकार कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है इसलिए कम से कम चालू माह के दौरान चीनी निर्यात हेतु सरकारी स्वीकृति मिलना बहुत मुश्किल लगता है।
माना जा रहा है कि 4 जून को चुनाव परिणाम आने के बाद केन्द्र की नई सरकार ही सभी तथ्यों को दिन में रखकर चीनी का निर्यात खोलने पर विचार कर सकती है।
शीर्ष उद्योग संस्था- इस्मा के मुताबिक अक्टूबर 2023 से अप्रैल 2024 के सात महीनों में देश के अंदर 314 लाख टन चीनी के उत्पादन की पुष्टि हो चुकी है जबकि मई से अगस्त 2024 के दौरान 5-6 लाख टन का अतिरिक्त उत्पादन होने की उम्मीद है।
अप्रैल के अंत में करीब डेढ़ दर्जन इकाइयों में गन्ना की क्रशिंग जारी थी। उधर कर्नाटक, एवं तमिलनाडु में जुलाई-अगस्त के दौरान गन्ना पेराई का विशेष सत्र आयोजित होता है।
इस्मा के मुताबिक चालू मार्केटिंग सीजन के आरंभ में स्वदेशी उद्योग के पास 57 लाख टन चीनी का पिछला बकाया स्टॉक मौजूद था जबकि सीजन के दौरान 320 लाख टन का उत्पादन होने की उम्मीद है।
इसके फलस्वरूप चीनी की कुल उपलब्धता बढ़कर 377 लाख टन पर पहुंच जाएगी। इसमें से 285 लाख टन की घरेलू खपत होने के बाद उद्योग के पास 92 लाख टन चीनी का अधिशेष स्टॉक बच सकता है। यदि उसमें से 20 लाख टन के निर्यात की स्वीकृति दी जाए तब भी उद्योग के पास 72 लाख टन चीनी का अधिशेष स्टॉक बच जाएगा
जो अगले मार्केटिंग सीजन के आरंभिक तीन महीनों (अक्टूबर-दिसम्बर- 2024) की घरेलू मांग एवं खपत को पूरा करने के लिए आवश्यक स्टॉक 60 लाख टन से 20 प्रतिशत ज्यादा है। ऐसी हालत में सरकार को 20 लाख टन चीनी के निर्यात की मंजूरी देने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए।
