चना के बजाए पीली मटर का आयात बढ़ाने पर रहेगा जोर

08-May-2024 01:41 PM

मुम्बई । यद्यपि केन्द्र सरकार ने 31 अक्टूबर 2024 तक देसी चना एवं पीली मटर के आयात की अनुमति प्रदान की है। लेकिन वैश्विक बाजार में स्टॉक की उपलब्धता एवं कीमतों को देखते हुए लगता है कि भारतीय आयातकों का रूझान चना के बजाए मटर के आयात की तरफ ज्यादा रहेगा।

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने चना का घरेलू उत्पादन घटकर 121-122 लाख टन रह जाने का अनुमान लगाया है जबकि उद्योग-व्यापार क्षेत्र के समीक्षकों का मानना है कि वास्तविक उत्पादन इससे 20-25 प्रतिशत कम हो सकता है क्योंकि एक तो रबी सीजन में इसका बिजाई क्षेत्र घट गया और दूसरे, प्रतिकूल मौसम से फसल को क्षति भी हुई।

यही कारण है कि आपूर्ति का पीक सीजन होने के बावजूद मंडियों में चना की आवक का दबाव नहीं पड़ रहा है और इसका दाम भी सरकारी समर्थन मूल्य से काफी ऊंचा है। 

ऑस्ट्रेलिया एवं तंजानिया सहित अन्य निर्यातक देशों में चना का सीमित स्टॉक बचा हुआ है और नई फसल आने में काफी देर है। ऑस्ट्रेलिया में चना की बिजाई अभी शुरू ही हुई है और अक्टूबर-नवम्बर में इसके नए माल की आवक शुरू होगी जबकि तब तक भारत में शुल्क मुक्त आयात की अवधि ख़त्म हो जाएगी।

मई से अक्टूबर 2024 के दौरान भारत में अधिक से अधिक 2.50 लाख टन चना का आयात होने की संभावना है जबकि उत्पादन में इससे बहुत ज्यादा गिरावट आई है।

इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया में चना का भाव हाजिर स्टॉक के साथ-साथ अगली नई फसल के लिए भी तेजी से बढ़ने लगा है। इसे देखते हुए भारतीय आयातक अगाऊ सौदे करने से हिचक रहे हैं। 

इसके मुकाबले पीली मटर का स्टॉक निर्यातक देशों में अधिक है और इसकी नई फसल अगस्त-सितम्बर में ही आने लगेगी।

इसका दाम भी चना से काफी कम है इसलिए भारतीय आयातक इसका आयात करने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया का चना 'पड़ते' में नहीं आया तो आयातक इसे मंगाने में कम रूचि दिखाएंगे।