बासमती निर्यातकों द्वारा सरकार से लेवी को स्थगित करने का आग्रह

17-Apr-2026 07:05 PM

नई दिल्ली। बासमती चावल के निर्यातकों ने केन्द्र सरकार एवं एपीडा से अनुबंध पंजीकरण पर लगाई जाने वाली 70 रुपए प्रति टन खास जीएसटी की लेवी को फिलहाल स्थगित रखने या वापस लेने का आग्रह किया है। उल्लेखनीय है कि बासमती एक्सपोर्ट डवलपमेंट फाउंडेशन के लिए निर्यातकों से यह लेवी वसूली जाती है। 

निर्यातकों का कहना है की भुगतान में विलम्ब होने, शिपिंग खर्च में जोरदार बढ़ोत्तरी होने तथा मार्जिन (लाभ) में भारी कमी आने से छोटे एवं मध्यम श्रेणी के निर्यातकों की वित्तीय स्थिति बहुत कमजोर हो गई है और वे इस लेवी का भुगतान करने की हालत में नहीं हैं। निर्यातक इस बात से चिंतित हैं कि लेवी के रूप में यह अतिरिक्त वित्तीय भार वैश्विक निर्यात बाजार में उसकी प्रतिस्पर्धी क्षमता को बेहद कमजोर कर सकता है और उसका मार्जिन ऋणात्मक हो जाएगा।

ईरान और अमरीका के बीच शुद्ध शुरू होने के बाद से ही भारतीय बासमती चावल निर्यातक बेहद कठिन दौर से गुजर रहे हैं और उन्हें सरकारी सहयोग-समर्थन एवं प्रोत्साहन की सख्त आवश्यकता है। उद्योग समीक्षकों के अनुसार निर्यातकों को विभिन्न समस्याओं बाधाओं एवं चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है जबकि अनुबंध पंजीकरण का वार्षिक शुल्क बहुत ऊंचा हो जाता है। 

उल्लेखनीय है कि देश से प्रति वर्ष 60 लाख टन से अधिक बासमती चावल का निर्यात होने लगा है और इस पर लगी 70 रुपए प्रति टन की लेवी के रूप में एपीडा / फाउंडेशन द्वारा 42 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व वसूला जाता है जबकि जीएसटी इसमें शामिल नहीं है।

निर्यातकों पर यह असहनीय बोझ बन जाता है। सरकार को तुरंत इसे वापस लेना चाहिए ताकि निर्यातकों को कुछ राहत मिल सके। मध्य-पूर्व, पश्चिम एशिया एवं खाड़ी क्षेत्र के देशों में भारत से 70 प्रतिशत से अधिक बासमती चावल का सालाना निर्यात होता है।