भारत से चीन को लालमिर्च के निर्यात पर एचएमपीवी रोग का असर नहीं
09-Jan-2025 04:09 PM
गुंटूर । अखिल भारतीय लालमिर्च निर्यातक संघ के चेयरमैन ने कहा है कि यद्यपि चीन में एचएमपीवी रोग का भयंकर प्रकोप देखा जा रहा है लेकिन भारत से वहां लालमिर्च के आयात पर अभी तक कोई असर नहीं पड़ा है। उल्लेखनीय है कि चीन भारतीय लालमिर्च का सबसे प्रमुख खरीदार है।
वहां इसका आयात कुछ नीचे दाम पर किया जा रहा है। दरअसल चीन के आयातक भारत में लालमिर्च की नई फसल के आने तथा कीमत घटने का इंतजार कर रहे हैं।
अब नए माल की आवक आरंभ हो चुकी है और इसका दाम भी पिछले साल से नीचे चल रहा है इसलिए आगामी समय में निर्यात बढ़ सकता है।
लेकिन बांग्ला देश को लालमिर्च के निर्यात में कुछ बाधा आ रही है क्योंकि वहां कुछ समस्याएं हैं। हालात सामान्य होने पर वहां भी निर्यात की गति तेज हो सकती है। मलेशिया के आयातक जल्दी ही सक्रिय हो सकते हैं क्योंकि वहां पूर्व में आयातित माल का स्टॉक कम बचा हुआ है।
मसाला बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष (2024-25) के आरंभिक सात महीनों में यानी अप्रैल-अक्टूबर 2024 के दौरान भारत से लालमिर्च का निर्यात बढ़कर 3.30 लाख टन पर पहुंच गया जो वर्ष 2023 के इन्हीं महीनों के शिपमेंट 3.04 लाख टन से 9 प्रतिशत अधिक रहा। रुपए में तो निर्यात आय बढ़ी मगर डॉलर में घट गई।
2023 की तुलना में 2024 के दौरान लालमिर्च की निर्यात आमदनी 75.70 करोड़ डॉलर से 15 प्रतिशत घटकर 64.50 करोड़ डॉलर पर अटक गई।
घरेलू उत्पादक मंडियों में लालमिर्च का दाम गत वर्ष की तुलना में काफी नीचे आ गया है। ब्यादगी 'केडीएल' वैरायटी की लालमिर्च का भाव जनवरी 2024 में उछलकर 50000/55000 रुपए प्रति क्विंटल की उंचाई पर पहुंच गया था जो अब लुढ़ककर 32,000 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास रह गया है।
इस तरह कीमत में 41 प्रतिशत की जोरदार गिरावट आ गई। मंडियों में लालमिर्च की अच्छी आवक हो रही है और मांग के अनुरूप इसकी कीमतों में आगे तेजी-मंदी आ सकती है।
