भारत में आयात शुल्क घटने की उम्मीद से ऑस्ट्रेलिया में चना की अगली फसल के अच्छे सौदे
03-Apr-2024 06:22 PM
ब्रिसबेन । ऑस्ट्रेलिया में फरवरी के अंतिम दिनों से ही चना, मसूर एवं फाबा बीन्स का भाव सीमित उतार चढ़ाव के साथ लगभग स्थिर बना हुआ है। चना में कारोबार अब मौजदू स्टॉक के बजाए अगली नई फसल की तरफ केन्द्रित होने लगा है क्योंकि व्यापारियों- निर्यातकों को उम्मीद है कि भारत सरकार जून में आम चुनाव की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद चना पर लगे भारी-भरकम आयात शुल्क को कम या खत्म कर सकती है।
इसी सोच के सहारे व्यापारी अगली नई फसल के चने का अग्रिम सौदा बड़े पैमाने पर करने पर लगे हैं ताकि इसका बेहतर स्टॉक बना सके।
ऑस्ट्रेलिया में किसानों का ध्यान शीतकालीन फसलों की बिजाई पर लगा हुआ है जिसमें चना भी शामिल है इसलिए वहां सीमित मात्रा में इस दलहन का कारोबार हो रहा है। रमजान की मांग पहले ही पूरी हो चुकी है इसलिए मुस्लिम देश इसकी खरीद में कम दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
हाल के दिनों में ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी भाग में हुई अच्छी वर्षा से मसूर, मटर तथा फाबा बीन्स की खेती के लिए उपयुक्त माहौल बन गया है। चालू माह के तीसरे चौथे सप्ताह से वहां दलहन फसलों की बिजाई आरंभ होने वाली है।
चना की बिजाई मई के दूसरे पखवाड़े से शुरू होकर जून तक जारी रहेगी। ल्यूपिन का उत्पादन मुख्यत: वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया प्रान्त में होता है और वहीँ से इसका सर्वाधिक निर्यात भी किया जाता है।
वहां किसान सूखे में ही इसकी बिजाई कर रहे हैं क्योंकि आगामी सप्ताहों के दौरान वहां पतझड़ कालीन वर्षा होने की संभावना है जिससे फसल को फायदा होगा।
भारत में देसी चना के आयात पर 66 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगा हुआ है इसलिए ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से इसका नगण्य आयात किया जाता है। इस बार भारत में चना का उत्पादन कुछ घटने की संभावना है।
