बागानी उत्पादन एवं मसालों के लिए पिछला साल चुनौती पूर्ण रहा

06-Jan-2025 10:55 AM

कोच्चि । यूनाइटेड प्लांटर्स एसोसिएशन ऑफ साउथ इंडिया (उपासी) के अध्यक्ष का कहना है कि वर्ष 2024 का समय बागानी उत्पादों (चाय, कॉफी, रबर) तथा मसालों (छोटी इलायची एवं कालीमिर्च) के लिए मिश्रित रहा।

इसमें चुनौतियों और अवसरों का मिश्रण देखा गया एक तरफ उत्पादन पर प्रतिकूल मौसम का असर पड़ा तो दूसरी ओर इसकी कीमतों में सुधार दर्ज किया गया।

2025 का वर्तमान वर्ष कुछ सकारात्मक संकेत दे रहा है क्योंकि इसमें बागानी उत्पादों तथा मसालों का दाम कुछ और मजबूत रहने की उम्मीद है। 

उपासी अध्यक्ष के मुताबिक वैश्विक स्तर पर जारी तनाव के कारण पिछले साल कई देशों की अर्थ व्यवस्था प्रभावित हुई। रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध चल रहा है और पश्चिम एशिया में स्थिति बहुत खराब है।

इससे स्वेज नहर से लेकर समुद्री आवागमन प्रभावित हो रहा है। लाल सागर के समुद्री मार्ग पर भी खतरा बना हुआ है।

सूखे की वजह से पनामा नहर के मार्ग से यातायात में कठिनाई हो रहे है। इसकी वजह से अनेक उत्पादों का परिवहन खर्च बढ़ गया। 

कीमतों के बारे में उपासी अध्यक्ष का कहना था कि मूल्य वृद्धि मुख्यत: आपूर्ति पक्ष पर निर्भर करती है। जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम प्रतिकूल होने से उत्पादन में गिरावट आने की आशंका रहती है जो बागान सेक्टर के लिए उत्साहवर्धक नहीं है।

लागत खर्च में वृद्धि एवं उत्पादन में कमी की वजह से कीमतों में होने वाली बढ़ोत्तरी उत्पादकों की दृष्टि से ज्यादा लाभप्रद साबित नहीं होती है।

कीड़ों-रोगों के प्रकोप से भी फसल को नुकसान होता है। वर्तमान समय की मूल्य वृद्धि वस्तुतः उत्पादन  खर्च के लगभग बराबर ही है और यदि वास्तविक अर्थ में आंकलन किया जाए तो बागानी जिंसों की कीमतों में गिरावट का माहौल बना हुआ है। 

छोटी इलायची तथा कालीमिर्च के दाम में आई तेजी का मुख्य कारण घरेलू तथा वैश्विक स्तर पर उत्पादन कम होना माना जा सकता है।

ग्वाटेमाला एवं भारत में इलायची के उत्पादन में भारी गिरावट आने के संकेत मिल रहे हैं जबकि इसका पिछला  बकाया स्टॉक भी बहुत कम बचा हुआ है।

कालीमिर्च का उत्पादन भी घटने की संभावना है। इन दोनों मसालों की वैश्विक मांग मजबूत है। लेकिन विदेशों से आयात के कारण कालीमिर्च के दाम में जोरदार तेजी आना मुश्किल लगता है।