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10-Oct-2026 03:01 PM
नई दिल्ली। अफ्रीकी देशो की मजबूत मांग एवं डॉलर के मुकाबले रूपए के भारी अवमूल्यन के कारण भारतीय गैर बासमती चावल का फ्री ऑन बोर्ड निर्यात ऑफर मूल्य बढ़कर पिछले करीब एक साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। अफ्रीका तथा एशिया के प्रमुख आयातक देश अलनीनो के खतरे एवं समुद्री आवागमन में रुकावट को देखते हुए अपनी आंतरिक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु भारी मात्रा में भारतीय चावल की खरीद कर रहे है।
थाईलैंड में भयंकर बाढ़ से धान की फसल को नुकसान होने की आशंका से चावल का निर्यात ऑफर मूल्य ऊंचा एवं तेज हो गया है। इधर भारत में खरीफ कालीन धान का रकबा 3.7 प्रतिशत घट गया जबकि कुछ क्षेत्रों में वर्षा का अभाव होने से फसल की हालत भी कमजोर बताई जा रही है। धान-चावल का घरेलू बाजार भाव ऊंचा रहने की संभावना है। दूसरी ओर 1 अमरीकी का मूल्य बढ़ाकर 96-97 रूपए के बीच पहुंच गया है इससे निर्यातकों को चावल का निर्यात ऑफर मूल्य स्थिर रखने में सहायता मिल रही है।
सामुद्रिक परिवहन खर्च में हो रही वृद्धि से आयातक चावल की खरीद में कुछ देरी कर सकते है लेकिन यह स्थिति ज्यादा दिनों तक नहीं रहेगी। 5 प्रतिशत टूटे भारतीय सेला चावल का निर्यात ऑफर मूल्य फिलहाल 378 से 384 डॉलर प्रति टन के बीच चल रहा है। जबकि 5 प्रतिशत टूटे सफेद (कच्चा) चावल का दाम भी बढ़कर इसी स्तर पर पहुंच गया है। सफेद चावल की मांग अपेक्षाकृत ज्यादा मजबूत है। टुकड़ी चावल की भी अच्छी मांग देखी जा रही है।
उधर थाईलैंड में 5 प्रतिशत टूटे चावल का निर्यात ऑफर मूल्य गत सप्ताह के 460 डॉलर प्रति टन से बढ़कर अब 465-468 डॉलर प्रति टन की ऊंचाई पर पहुंच गया है। बाढ़ से कुछ प्रांतो में धान की फसल को वहां क्षति हुई है। उधर फिलीपींस में चावल की मांग बढ़ने की संभावना है। थाईलैंड के निर्यातकों ने पहले जो अनुबंध किया था उसकी डिलीवरी में देर हो गई थी लेकिन अब उसका शिपमेंट आरम्भ किया जा रहा है। इससे ऑफर मूल्य में कुछ तेजी आ गई।
भारत में पिछले एक दशक में पहली बार धान-चावल के उत्पादन में गिरावट आने की संभावना है। धान की नई फसल की कटाई तैयारी शुरू हो चुकी है।