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वर्षा की कमी से धान के उत्पादन क्षेत्र में भारी गिरावट

18-Sep-2026 07:21 PM

वर्षा की कमी से धान के उत्पादन क्षेत्र में भारी गिरावट

नई दिल्ली। दक्षिण भारत के चारों प्रमुख उत्पादक राज्यों- कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश एवं तमिलनाडु में मानसूनी वर्षा का भारी अभाव रहने से इस बार धान के उत्पादन क्षेत्र में भारी गिरावट आई।

इसके अलावा मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र एवं झारखंड सहित कुछ अन्य प्रांतों में भी धान का रकबा गत वर्ष से पीछे चल रहा है। इसके फलस्वरूप राष्ट्रीय स्तर पर इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसल का कुल उत्पादन क्षेत्र घटकर इस बार 429.28 लाख हेक्टेयर पर अटक गया जो पिछले साल की समान अवधि के रकबा 445.92 लाख हेक्टेयर से 16.64 लाख हेक्टेयर कम है। पिछले सप्ताह यह कमी 16.97 लाख हेक्टेयर आंकी गई थी। 

धान का उत्पादन क्षेत्र इसके पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 405.36 लाख हेक्टेयर से काफी आगे निकल चुका है लेकिन गत वर्ष से पीछे है। इसका प्रमुख कारण यह है कि 2025-26 के खरीफ सीजन में धान का उत्पादन क्षेत्र तेजी से उछलकर सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया था क्योंकि किसानों को मानसूनी वर्षा का पूरा सहयोग समर्थन मिला था। 

पिछले साल के मुकाबले इस बार बासमती धान तथा 'ए' ग्रेड (प्रीमियम क्वालिटी) के धान का रकबा घटा है। सामान्य श्रेणी के धान का क्षेत्रफल लगभग सामान्य रहा है। सितम्बर में मानसून की वर्षा कम होने की संभावना है जिससे धान की फसल प्रभावित हो सकती है और चावल के उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।

अच्छी क्वालिटी के धान-चावल का उत्पादन ज्यादा घटने की संभावना है। सरकार के पास चावल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। धान की खेती अब बिल्कुल  अंतिम चरण में पहुंच गई है इसलिए आगे रकबा बढ़ना मुश्किल लगता है।