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01-Oct-2026 01:14 PM
नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश कम होने तथा अल नीनो मौसम चक्र का प्रभाव अगले कई महीनों तक जारी रहने की संभावना को देखते हुए खरीफ के साथ-साथ रबी सीजन में भी दलहन फसलों का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। इसके फलस्वरूप कीमतों में तेजी का माहौल बन सकता है।
घरेलू प्रभाग में आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ाने तथा कीमतों में तेजी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार दलहनों पर आयात शुल्क में कटौती करने पर गम्भीरतापूर्वक विचार कर सकती है। मालूम हो कि खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में पहले ही 5 प्रतिशत एवं 10 प्रतिशत बिंदु की कटौती की जा चुकी है।
ध्यान देने की बात है कि वर्तमान समय में मूंग के आयात पर प्रतिबंध लगा हुआ है और तुवर तथा उड़द के आयात को सीमा शुल्क से मुक्त रखा गया है इसलिए यदि शुल्क कटौती का निर्णय लिया जाता है तो भी इन तीन दलहनों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। दूसरी ओर देसी चना एवं मसूर पर 10-10 प्रतिशत तथा पीली मटर पर 30 प्रतिशत का मौलिक आयात शुल्क लागू है जिसे घटाया अथवा समाप्त किया जा सकता है। समझा जाता है कि चना तथा पीली मटर पर शुल्क की दर में परिवर्तन करने का निर्णय जल्दी ही लिया जा सकता है।
तुवर एवं उड़द के शुल्क मुक्त आयात की समयसीमा 31 मार्च 2027 तक पहले ही नियत हो चुकी है। यदि चना एवं पीली मटर पर सीमा शुल्क घटाया जाता है तो इसके आयात में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है। भारत में चना का आयात मुख्यतः ऑस्ट्रेलिया एवं अफ्रीका से तथा पीली मटर का आयात कनाडा एवं रूस से होता है जबकि मसूर का अधिकांश आयात कनाडा एवं ऑस्ट्रेलिया से किया जाता है। इसके अलावा म्यांमार एवं ब्राजील से उड़द और म्यांमार तथा अफ्रीकी देशों से तुवर का भारी भरकम आयात किया जाता है।
पिछले एक माह के दौरान चना, मूंग, मटर एवं तुवर के घरेलू बाजार मूल्य में करीब 10 प्रतिशत का इजाफा हो गया। इसमें से 3-5 प्रतिशत की वृद्धि तो पिछले एक सप्ताह में हुई है। दलहनों की पैदावार इस बार घटने की संभावना है।