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23-Oct-2026 11:14 AM
खुले बाजार में गेहूं की सरकारी बिक्री के लिए केंद्र सरकार द्वारा OMSS के तहत टेंडर जारी किए जाने के बावजूद रोलर फ्लोर मिलों और आटा चक्कियों को जरूरत के अनुरूप गेहूं नहीं मिल पा रहा है। सीमित सरकारी आपूर्ति और मिलों की मांग के बीच अंतर बढ़ने से पिछले दो दिनों में दिल्ली गेहूं के भाव 70/80 रुपए प्रति क्विंटल तक उछल गए हैं। इसका असर आटा, मैदा और सूजी की कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है। सीमित आपूर्ति के चलते दिल्ली में गेहूं के भाव दो दिनों के भीतर बढ़कर 3120/3150 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। अन्य राज्यों में भी रोलर फ्लोर मिलों और व्यापारियों को पर्याप्त मात्रा में गेहूं नहीं मिलने से बाजार में तेजी का रुख बना हुआ है। मिलों की खरीद बढ़ने और उपलब्ध गेहूं पर प्रतिस्पर्धा तेज होने से कीमतों को समर्थन मिल रहा है। सरकार ने पिछले बुधवार से खुले बाजार में बिक्री के लिए टेंडर जारी किया था। दिल्ली की रोलर फ्लोर मिलों और आटा चक्कियों को साप्ताहिक प्रोसेसिंग के लिए लगभग एक लाख मीट्रिक टन गेहूं की जरूरत बताई जा रही है, जबकि पहले टेंडर में 4,000 मीट्रिक टन और इस सप्ताह बढ़ाकर 5,000 मीट्रिक टन गेहूं की बिक्री की गई। मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर होने से सरकारी बिक्री का लाभ मिलों को उनकी आवश्यकता के अनुपात में नहीं मिल पा रहा है।
आगे बाजार की दिशा सरकारी बिक्री पर निर्भर
आगामी दिनों में गेहूं बाजार की दिशा काफी हद तक केंद्र सरकार द्वारा OMSS के तहत की जाने वाली बिक्री की मात्रा पर निर्भर करेगी। यदि अगले सप्ताह के टेंडर में सरकार बिक्री की मात्रा नहीं बढ़ाती है और मिलों को उनकी जरूरत के अनुसार गेहूं उपलब्ध नहीं होता, तो कीमतों में तेजी जारी रह सकती है। सरकारी आपूर्ति में बढ़ोतरी होने पर तेजी पर अंकुश लग सकता है।