सूरजमुखी तेल की घरेलू खपत 10 प्रतिशत घटने का अनुमान

03-Apr-2026 03:32 PM

मुंबई। एक अग्रणी रेटिंग एजेंसी का कहना है कि वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान भारत में दो कारणों से सूरजमुखी तेल की खपत में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। एक तो मध्य-पूर्व में जारी संकट के कारण इसकी आपूर्ति श्रंखला में बाधा पड़ सकती है और दूसरे, शिपिंग खर्च बढ़ने से इसका आयात महंगा हो जाएगा। इससे अनेक उपभोक्ता महंगे सूरजमुखी तेल के बजाए सस्ते सोयाबीन तेल एवं राइस ब्रान तेल की ओर आकर्षित हो सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि भारत में उपयोग के मुकाबले सूरजमुखी तेल का नगण्य उत्पादन होता है इसलिए विदेशों से विशाल मात्रा में इसे मंगाने की आवश्यकता पड़ती है। सूरजमुखी तेल का आयात मुख्यतः रूस, युक्रेन एवं अर्जेंटीना से होता है। रेटिंग एजेंसी के अनुसार सूरजमुखी तेल के आयात पर होने वाले खर्च में ज्यादा कमी-वृद्धि नहीं होगी क्योंकि आयात की मात्रा में होने वाली कटौती को इसकी ऊंची कीमत समयोजित कर देगी।

रेटिंग एजेंसी के अनुसार सूरजमुखी तेल के रिफाइनर्स का लाभांश स्थिर रह सकता है क्योंकि पहले कम दाम पर किए गए आयात का जो स्टॉक बचा हुआ है यह लाभप्रदता बढ़ाएगा जबकि बाद में ऊंचे मूल्य पर होने वाला आयात इसे घटा सकता है।

क्रूड खनिज तेल का भाव तेज होता जा रहा है जबकि पश्चिम एशिया संकट के कारण आयात में बाधा उत्पन्न हो रही है। जहाज़ों (कंटेनरों) का किराया-भाड़ा काफी बढ़ गया है। इससे निकट भविष्य में रिफाइनर्स के पास क्रूड सूरजमुखी तेल का स्टॉक सीमित हो सकता है। रिफाइनर्स को आयात पर अधिक धनराशी खर्च करनी पड़ेगी।