साप्ताहिक समीक्षा- धान-चावल
02-May-2026 08:34 PM
मांग कमजोर रहने से धान-चावल का भाव नरम
नई दिल्ली। बासमती एवं फाईन ग्रेड के धान की आपूर्ति प्रमुख उत्पादक मंडियों में लगातार घटती जा रही है जबकि इसके नए माल की आवक शुरू होने में लम्बा समय बाकी है। अगले महीने से खरीफ कालीन धान की खत आरंभ होती और अक्टूबर से नई फसल तैयार होकर मंडियों में आने लगेगी। उस बीच तेलंगाना सहित कुछ अन्य प्रांतों में रबी कालीन धान की नई फसल की कटाई-तैयारी आरंभ हो चुकी है।
शिपमेंट में बाधा
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से पश्चिम एशिया, मध्य-पूर्व एवं खाड़ी क्षेत्र के देशों में भारतीय बासमती चावल के निर्यात शिपमेंट में भारी बाधा पड़ रही है। इसके फलस्वरूप निर्यातक दुविधा में फंसे हुए है। भारत से करीब 70 प्रतिशत बासमती चावल का निर्यात इसी क्षेत्र में होता है जहां ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), इराक, कतर, ओमान, कुवैत, जोर्डन एवं बहरीन इसके प्रमुख खरीदार देश हैं।
दिल्ली
25 अप्रैल से 1 मई वाले सप्ताह के दौरान दिल्ली की नरेला मंडी में औसतन 2-3 हजार बोरी धान की दैनिक आवक हुई और केवल 1509 कम्बाइन धान का भाव 145 रुपए बढ़कर 4390 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंचा। अन्य किस्मों में कारोबार और भाव शांत रहा। छत्तीसगढ़ की भाटापाड़ा एवं राजिम मंडियों में क्रमश: 4500 बोरी एवं 2500 बोरी धान की रोजाना आवक हुई और कीमतों में स्थिरता या मामूली बढ़त दर्ज की गई।
उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर तथा राजस्थान के बूंदी एवं कोटा में धान की थोड़ी-बहुत आवक हो रही है। वहां कीमतों में 100-150 रुपए प्रति क्विंटल का उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया।
चावल
जहां तक चावल का सवाल है तो घरेलू प्रभाग में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम बनी हुई है और सरकार के पास भी इसका भारी-भरकम स्टॉक मौजूद है। शिपिंग समस्या के कारण बासमती चावल की निर्यात मांग कमजोर पड़ गई है। सरकार ने पेट्रोल-डीजल का दाम बढ़ाने का संकेत दिया है।
दिल्ली
दिल्ली के नया बाजार में विभिन्न किस्मों एवं श्रेणियों के चावल का कारोबार सुस्त रहा जिससे उसके दाम में 100 से 250 रुपए प्रति क्विंटल की नरमी आ गई। पंजाब के अमृतसर में भी यही स्थिति रही। राजस्थान की बूंदी मंडी में भी चावल कमजोर रहा।
