पोषण सुरक्षा के लिए दलहनों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर

16-Feb-2024 06:37 PM

नई दिल्ली । ग्लोबल पल्सेस कांफ्रेंस में भारत से दलहनों का आयात बढ़ाने का आग्रह किया गया ताकि पोषण सम्बन्धी जरूरतों को पूरा किया जा सके। यह तीन दिवसीय कार्यकम 15 फरवरी से आरम्भ हुआ जो भारत एवं विश्व के अन्य देशों के दलहन उत्पादकों, व्यापारियों एवं मिलर्स प्रोसेसर्स का वार्षिक आयोजन है।

इस कांफ्रेंस में केन्द्रीय कृषि मंत्री तथा खाद्य मंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार ने देश में दलहनों का उत्पादन बढ़ाने की दिशा में पर्याप्त कदम उठाए हैं और दलहन फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में भी नियमित रूप से बढ़ोत्तरी की जा रही है। इस कांफ्रेंस का आयोजन नैफेड के सहयोग से ग्लोबल पल्स कॉन फेडरेशन (जीपीसी) द्वारा किया गया है।

केन्द्रीय खाद्य मंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक के दौरान दलहनों के घरेलू उत्पादन में करीब 60 प्रतिशत भारी इजाफा हुआ है और यह वर्ष 2014 के 171 लाख टन से उछलकर 2024 में 270 लाख टन पर पहुंच गया।

खाद्य मंत्री के मुताबिक दाल-दलहन को न केवल भारत बल्कि विश्व के लिया एक हैरतअंगेज खाद्य आहार बनाने के लिए नैफेड तथा जीपीसी के बीच भविष्य में सहयोग निरंतर बढ़ता रहेगा उनका कहना था कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के तहत सरकार ने किसानों को दलहनों के उत्पादन की वास्तविक लागत से 50 प्रतिशत ऊंचा दाम सुनिश्चित किया है। इससे किसानों को आकर्षक वापसी हासिल हो रही है।

वर्तमान समय में एमएसपी का स्तर सबसे ऊंचा है और एक दशक पूर्व की तुलना में यह मसूर के लिए 117 प्रतिशत, मूंग के लिए 90 प्रतिशत, चना के लिए 75 प्रतिशत तथा तुवर एवं उड़द के लिए 60-60 प्रतिशत बढ़ाया जा चुका है। 

केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि भारत चना सहित कुछ अन्य दलहनों के उत्पादन में भारत निर्भर हो चुका है जबकि शेष दलहनों में कुछ अभाव बना हुआ है।

इसमें तुवर, उड़द एवं मसूर मुख्य रूप से शामिल हैं। वर्ष 2027 तक दलहनों के उत्पादन में पूर्व आत्मनिभर्रता प्राप्त करने के लिए निरंतर गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार ने नई-नई किस्मों के बीजों की आपूर्ति बढ़ा दी है तथा तुवर एवं उड़द का बिजाई क्षेत्र बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।