प्रशांत महासागर में अल नीनो के निर्माण से फसलों को खतरा
10-Jun-2026 04:07 PM
मुम्बई। विषुवतीय प्रशांत महासागर में अल नीनो मौसम चक्र का उदय होने से पूरी दुनिया के प्रभावित होने की आशंका है। इसके प्रभाव से कहीं भयंकर सूखा एवं अनावृष्टि तो कहीं अत्यन्त मूसलाधार वर्षा एवं बाढ़ का गंभीर प्रकोप रह सकता है। जबकि तापमान में भी भारी उतार-चढ़ाव आ सकता है।
वर्ष 2023 के बाद यह पहला अल नीनो है और इस बार इसकी तीव्रता, ताकत एवं गतिशीलता कुछ अधिक रहने की आशंका व्यक्त की जा रही है। यह मौसम चक्र विश्व स्तर पर कृषि एवं ऊर्जा क्षेत्र को ज्यादा प्रभावित करेगा जिससे मानव समुदाय की कठिनाई बढ़ सकती है।
प्रशांत महसागर में समुद्री जल सतह के जरूरत से ज्यादा गर्म हो जाने से अल नीनो का निर्माण होता है जो वैश्विक मौसम पैटर्न पर गहरा असर डालता है, कृषि फसलों को क्षतिग्रस्त कर देता है और पावर ग्रिड को नुकसान पहुंचा सकता है। ज्यादा शक्तिशाली अल नीनो परम्परागत रूप से ऑयल पाम, चाय, कॉफी, कपास एवं अनाजी फसलों की उपज दर को घटाता रहा है। चावल तथा गेहूं का उत्पादन भी इससे प्रभावित होता रहा है।
वर्ष 1997 में इसी तरह का एक शक्तिशाली अल नीनो आया था जिसके प्रभाव से विश्व स्तर पर कम से कम 30 हजार लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 100 अरब डॉलर मूल्य की फसलें बर्बाद हो गई थीं। वर्ष 2023 का अल नीनो भी काफी विनाशकारी साबित हुआ था।
समझा जाता है कि अल नीनो दिसम्बर या जनवरी में अपने शीर्ष (पीक) स्तर पर पहुंचेगा इसलिए भारत में खरीफ के साथ-साथ रबी फसलों को भी नुकसान होने की आशंका है। खरीफ फसलों की बिजाई अभी शुरू हुई है।
अल नीनो के प्रकोप से अमरीका के दक्षिणी भाग में जाड़े का मौसम अधिक ठंडा एवं नम हो सकता है, भारत में मानसून की बारिश कम हो सकती है और ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न भागों में भयंकर सूखा पड़ सकता है। खेतों एवं जंगलों में आग लगने की घटनाओं में भी वृद्धि होने की संभावना रहेगी।
