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14-Oct-2026 06:41 PM
दाल मिलों की कमजोर मांग, स्टॉकिस्टों की बढ़ती मुनाफावसूली और चना पर आयात शुल्क हटाए जाने की चर्चाओं के कारण घरेलू बाजार में चना की कीमतों में गिरावट का रुख बना हुआ है। हालांकि, ऊंचे भावों पर बिकवाली सीमित रहने से बाजार में गिरावट को कुछ हद तक नियंत्रित समर्थन मिल रहा है।
दिल्ली में कमजोर लिवाली के चलते चना के भाव आज 100 रुपये प्रति क्विंटल घट गए। इस गिरावट के बाद मध्य प्रदेश लाइन के भाव 7,375–7,400 रुपये और राजस्थान लाइन के भाव 7,450 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इसी प्रकार अन्य प्रमुख उत्पादक मंडियों में भी चना की कीमतों में नरमी दर्ज की गई।
इंदौर में चना 100 रुपये घटकर 7,500–7,650 रुपये प्रति क्विंटल और कटनी में 150 रुपये कमजोर होकर 7,400–7,450 रुपये प्रति क्विंटल रह गया। अकोला में भाव 125 रुपये घटकर 7,700–7,750 रुपये तथा नागपुर में 100 रुपये की गिरावट के साथ 7,700–7,750 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।
देसी चना में गिरावट और कमजोर मांग का असर आयातित चना पर भी पड़ा। मुंबई में तंजानिया चना 100–150 रुपये की नरमी के बाद 7,350–7,400 रुपये और ऑस्ट्रेलियाई चना 7,500–7,550 रुपये प्रति क्विंटल रह गया। मुंद्रा और कांडला बंदरगाहों पर ऑस्ट्रेलियाई चना के भाव 7,375–7,400 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।
कमजोर मांग के बावजूद आपूर्ति पक्ष से मिल सकता है सहारा
आगामी खपत के सीजन के कारण चना दाल और बेसन की मांग बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल दाल मिलों की खरीदारी कमजोर बनी हुई है। घरेलू बाजार में मिलों के पास चना का बकाया स्टॉक सीमित है, जबकि उत्पादक मंडियों में देसी चना की आवक भी जरूरत के अनुरूप नहीं हो रही है।
बंदरगाहों पर आयातित चना का स्टॉक सीमित बताया जा रहा है। तंजानिया से आयात कम होने और ऑस्ट्रेलिया से चना मंगाना महंगा पड़ने के कारण आयातित माल की उपलब्धता तथा लागत घरेलू बाजार के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है।
दूसरी ओर, प्रमुख उत्पादक राज्यों में खेतों की नमी कम होने से आगामी रबी सीजन में चना की बुवाई को लेकर चिंता बनी हुई है। कर्नाटक और महाराष्ट्र के कई क्षेत्रों में सूखे की स्थिति घोषित किए जाने से भी फसल की संभावनाओं पर नजर रखी जा रही है।
बाजार का रुख
फिलहाल कमजोर मांग, स्टॉकिस्टों की मुनाफावसूली और आयात शुल्क हटाए जाने की चर्चाओं से चना बाजार पर दबाव बना हुआ है। हालांकि, सीमित घरेलू उपलब्धता, महंगे आयात और आगामी रबी बुवाई को लेकर अनिश्चितता कीमतों को सहारा दे सकती है।