कमजोर मांग के बावजूद भारतीय चावल का निर्यात मूल्य स्थिर

03-Apr-2026 12:10 PM

हैदराबाद। पश्चिम एशिया के संकट एवं ऊंचे शिपिंग खर्च के कारण चावल का वैश्विक कारोबार प्रभावित हो रहा है। भारत, थाईलैंड, वियतनाम, पाकिस्तान एवं म्यांमार जैसे शीर्ष चावल निर्यातक देशों को अभी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 

चालू सप्ताह के दौरान 5 प्रतिशत टूटे भारतीय सेला चावल का निर्यात ऑफर मूल्य 341 से 348 डॉलर प्रति टन के बीच दर्ज किया गया जो पिछले सप्ताह के बराबर ही है। इसी तरह 5 प्रतिशत टूटे सफेद चावल का निर्यात ऑफर मूल्य भी 336-341 डॉलर प्रति टन पर स्थिर रहा।

शिपमेंट चार्ज काफी ऊंचा हो गया है लेकिन डॉलर के सापेक्ष भारतीय रुपए की विनिमय दर में हो रहे भारी परिवर्तन के कारण निर्यातकों को चावल का ऑफर मूल्य स्थिर रखने में मदद मिल रही है। 

निर्यातकों का कहना है कि ऊंचे शिपिंग खर्च के कारण अफ्रीकी देशों में चावल की मांग को पूरा करने के लिए सीमित मात्रा में इसकी खरीद कर रहे हैं। ईरान-इजरायल युद्ध के कारण खाड़ी क्षेत्र के देशों में बासमती चावल के निर्यात पर भी कुछ असर पड़ रहा है। 

उधर वियतनाम में 5 प्रतिशत टूटे चावल का निर्यात ऑफर मूल्य गत सप्ताह के 350-355 डॉलर प्रति टन से उछलकर चालू सप्ताह में 375 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया। निर्यातकों के अनुसार धान की शीत-बसंतकालीन फसल की कटाई-तैयारी अंतिम चरण में पहुंचने के करने चावल की आपूर्ति घटने लगी है और खनिज तेल का अभाव होने से उत्पादन की लागत बढ़ गई है। 

थाईलैंड में भी इसी तरह का संकट मौजूद है जिससे वहां चावल का निर्यात ऑफर मूल्य गत सप्ताह के 365 डॉलर प्रति टन से बढ़कर अब 370-375 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया है। बांग्ला देश में चावल का घरेलू बाजार भाव काफी ऊंचा हो गया है।