गेहूं की सरकारी खरीद गत वर्ष से बेहतर होने की उम्मीद
03-Apr-2025 01:40 PM

नई दिल्ली। इस वर्ष मार्च माह के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर लगभग 8.50 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई जो पिछले साल की खरीद 2.50 लाख टन से करीब 6 लाख टन ज्यादा रही।
इसकी अधिकांश खरीद मध्य प्रदेश में की गई जहां किसानों को 2600 रुपए प्रति क्विंटल का ऊंचा शुल्क प्राप्त हो रहा है। इसमें केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित 2425 रुपए प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तथा राज्य सरकार द्वारा घोषित 175 रुपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस शामिल है।
मध्य प्रदेश भारत के शीर्ष गेहूं उत्पादक राज्यों में साहिल है और वहां शानदार उत्पादन की उम्मीद के साथ नए माल की आवक जोर पकड़ने से इस महत्वपूर्ण-खाद्यान्न की कीमतों में नरमी आने लगी है। सरकारी दाम ऊंचा होने से वहां विभिन्न एजेंसियों के क्रय केन्द्रों पर गेहूं की अच्छी आवक होने के संकेत मिल रहे हैं।
मार्च में राजस्थान में सरकारी एजेंसियों द्वारा करीब 40 हजार टन गेहूं खरीदा गया। वहां गेहूं पर न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर 150 रुपए का अतिरिक्त बोनस देने की घोषणा की गई है जिससे किसानों को 2575 रुपए प्रति क्विंटल का मूल्य प्राप्त होगा।
राजस्थान में गेहूं का उत्पादन पिछले साल के लगभग बराबर ही होने की संभावना है जबकि केन्द्र सरकार ने वहां एमएसपी पर खरीदे जाने वाले गेहूं के गुणवत्ता मानकों में कुछ राहत-रियायत देने की घोषणा की है। इससे सरकारी खरीद बढ़ेगी।
पंजाब-हरियाणा में 1 अप्रैल से गेहूं की खरीद का मार्केटिंग सीजन आरंभ हो गया। वहां ऊंचे मंडी शुल्क के कारण मिलर्स- प्रोसेसर्स एवं व्यापारी- स्टॉकिस्ट गेहूं की खरीद में ज्यादा सक्रियता नहीं दिखाते हैं और इसलिए सरकारी एजेंसियों को किसानों से अधिकांश गेहूं खरीदने का अवसर मिल जाता है।
इस बार भी ऐसा ही होगा। पंजाब केन्द्रीय पूल में गेहूं का सर्वाधिक योगदान देने वाला राज्य है। केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय ने इस बार कुल 313 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है और उसे यह लक्ष्य आसानी से हासिल हो जाने का भरोसा है। पिछले साल 266 लाख टन गेहूं खरीदा गया था।