गेहूं के सरकारी एवं व्यापारिक उत्पादन अनुमान में भारी अंतर होने से दुविधा बरकरार
05-Apr-2025 01:05 PM

नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने गेहूं का घरेलू उत्पादन 2023-24 सीजन के 1133 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर से करीब 21 लाख टन बढ़कर 2024-25 के वर्तमान रबी सीजन में 1154 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने का अनुमान लगाया है।
इस अनुमान से प्रतीत होता है कि चालू वर्ष के दौरान घरेलू प्रभाग में गेहूं की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति अत्यन्त सुगम बनी रहेगी और इसकी कीमतों पर नियंत्रण रहेगा। लेकिन पिछला अनुभव इसकी गवाही नहीं देता है।
सरकार ने 2023-24 के सीजन में 1132.90 लाख टन गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन आंका था लेकिन फिर भी मंडियों में इसकी आवक कम हुई और कीमत ऊंची बनी रही। गेहूं एवं इसके मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्यात पर लम्बे समय से प्रतिबंध लगा हुआ है।
सरकार ने इस पर भंडारण सीमा भी लगा दिया था लेकिन फिर भी न तो आपूर्ति बढ़ी और न ही कीमत घटी। हालत यह हो गई कि दिसम्बर 2024 से फरवरी 2025 के दौरान सरकार को अपने स्टॉक से 30 लाख टन गेहूं को मिलर्स- प्रोसेसर्स के हाथों बेचने के लिए विवश होना पड़ा। यदि 1133 लाख टन गेहूं का उत्पादन हुआ होता तो इन अतिरिक्त उपायों की जरूरत ही नहीं पड़ती।
अब एक बार फिर सरकार ने 1154 लाख टन से अधिक गेहूं के रिकॉर्ड घरेलू उत्पादन का अनुमान लगाया है लेकिन उद्योग- व्यापार क्षेत्र को इस पर संदेह है।
उसका कहना है कि गेहूं का उत्पादन पिछले साल से कुछ अधिक हो सकता है लेकिन सरकारी अनुमान की तुलना में बहुत कम होगा
विभिन्न उद्यमियों एवं व्यापार विश्लेषकों के अनुसार गेहूं का वास्तविक उत्पादन अधिक से अधिक 1100 लाख टन और कम से कम 980 लाख टन हो सकता है। इस तरह गेहूं के सरकारी एवं व्यापारिक उत्पादन अनुमान में भारी अंतर रहने से बाजार में दुविधा की स्थिति बनी हुई है।
सरकार अधिक से अधिक गेहूं खरीद कर बफर स्टॉक को ऊंचा बनाना चाहती है ताकि अभाव के दिनों में वह प्रभावी ढंग से बाजार में हस्तक्षेप करने में सफल हो सके।
गेहूं की खरीद का लक्ष्य 313 लाख टन नियत किया गया है जो पिछले साल की कुल वास्तविक खरीद 266 लाख टन से 47 लाख टन ज्यादा है।
सरकार के पास करीब 124 लाख टन का पिछला स्टॉक भी मौजूद है जिससे केन्द्रीय पूल में गेहूं की अच्छी उपलब्धता हो सकती है।
लेकिन खुले बाजार में जून के बाद आपूर्ति का संकट बढ़ने की आशंका है जिससे कीमतें पुनः मजबूत हो सकती हैं। सरकारी स्टॉक से घरेलू बाजार में गेहूं की आपूर्ति बढ़ाने में कितनी सहायता मिलती है यह देखना जरुरी होगा।