एपीडा द्वारा 40 लाख हेक्टेयर में बासमती की खेती का सर्वे करने का प्लान
07-May-2026 08:04 PM
नई दिल्ली। केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय के अधीनस्थ निकाय- कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने इस वर्ष 40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बासमती की खेती के लिए सर्वेक्षण करने का प्लान बनाया है जो मौजूद समय में इसके वास्तविक क्षेत्रफल से खरीद दोगुना ज्यादा है।
इस प्लान से प्रतीत होता है कि यह एजेंसी नए-नए क्षेत्रों में सर्वेक्षण कर सकती है जबकि उन क्षेत्रों के लिए बासमती धान-चावल को भौगोलिक संकेतक का दर्जा (जी आई टैग) प्राप्त नहीं है। मध्य प्रदेश सरकार बार-बार दलील दे रही है कि राज्य के कई जिलों में उत्पादित धान बासमती श्रेणी का होता है लेकिन एपीडा ने कभी इसे स्वीकार नहीं किया और लम्बे समय से यह मामला अदालत में फंसा हुआ है।
पिछले सप्ताह केन्द्रीय वाणिज्य राज्य मंत्री ने देश के पहले ए आई आधारित बासमती धान सर्वे प्रोजेक्ट (2026-27) का शुभारम्भ किया। इस मत्वाकांक्षी परियोजना का परिचालन एपीडा द्वारा किया जाएगा और इसमें लगभग 40 लाख हेक्टेयर का क्षेत्र शामिल होगा। ध्यान देने वाली बात है कि वर्तमान समय में मान्यता प्राप्त इलाकों (राज्यों) में बासमती धान का कुल उत्पादन क्षेत्र महज 21.40 लाख हेक्टेयर के आसपास है।
यदि एपीडा लगभग 40 लाख हेक्टेयर में बासमती के लिए सर्वेक्षण अभियान चलाता है तो इस पर संदेह उत्पन्न होना स्वाभाविक ही है। मध्य प्रदेश एवं राजस्थान समेत कुछ अन्य प्रांतों में उत्पादित लम्बे दाने वाले सुगंधित धान को बासमती की मान्यता देने की मांग उठती रही है।
एपीडा का कहना है कि केवल पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश एवं जम्मू कश्मीर के दो जिलों में उत्पादित धान को ही वास्तविक बासमती की मान्यता प्राप्त है। ऐसा प्रतीत होता है कि उत्पादन क्षेत्र का दायरा बढ़ाकर सरकार इस सुगंधित उत्पाद का क्षेत्रफल बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
