बिहार में मखाना बोर्ड स्थापित होने पर उत्पादकों को होगा फायदा
03-Feb-2025 11:26 AM
दरभंगा । उत्तरी बिहार में बड़े पैमाने पर उत्पादित होने वाला मखाना अब वैश्विक बाजार में भी पहुंचने लगा है लेकिन वहां तक पहुंचने तथा आयातकों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करने में इसे काफी लम्बा समय लग गया।
चूंकि मखाना के लिए बोर्ड एच एस एन कोड निर्धारित नहीं है इसलिए इसके निर्यात का वास्तविक आंकड़ा प्राप्त करना बहुत मुश्किल है।
केन्द्रीय वित्त मंत्री ने 2025-26 के आम बजट में बिहार में मखाना बोर्ड स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है जिसे इसके उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन तथा निर्यात को बढ़ाने में सहायता मिलेगी और उत्पादकों को बेहतर मूल्य हासिल हो सकेगा। मखाना में 'बी' संवर्ग का विटामिन, प्रोटीन तथा फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
उत्तरी बिहार के अनेक जिलों- दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया एवं कटिहार तथा पश्चिमी बंगाल के कुछ सीमावर्ती जिलों में मखाने का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है।
प्रमुख पर्व- त्यौहारों एवं मांगलिक उत्सवों के दौरान मखाने की मांग एवं खपत काफी बढ़ जाती है। नवरात्रि, कोजागरा, ईद जैसे त्यौहार के समय इसका कारोबार बड़े पैमाने पर होता है।
कोरोना काल में इसका महत्व काफी बढ़ गया था जब विश्व स्तर पर डाक्टरों एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया था कि मखाना में मानवीय इम्युनिटी बढ़ाने का गुण मौजूद रहता है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के दरभंगा स्थित राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केन्द्र के मुख्य वैज्ञानिक का कहना है कि व्रत-उपवास में मखाना का उपयोग करना बहुत फायदेमंद होता है।
अनेक रोगों के निदान के लिए भी इसका प्रयोग करने का सुझाव दिया जाता है। अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कहा कि उत्पादन बढ़ाने, आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावी बनाने, प्रोसेसिंग का प्रबंध करने तथा उत्पादकों के लाभप्रद मूल्य दिलाने के लिए राज्य सरकार की भागीदारी के साथ एक व्यापक प्रोग्राम आरंभ किया जाएगा।
