अल नीनो का खतरा बरकरार
14-Aug-2026 11:10 AM
बेशक जुलाई में दक्षिण-पश्चिम मानसून की हालत बेहतर रही और देश के विभिन्न भागों में उम्मीद से ज्यादा बारिश हुई। अगस्त में भी वर्षा की स्थिति अभी तक सामान्य बनी हुई है जिससे खरीफ फसलों की बिजाई में काफी सुधार आया है लेकिन अल नीनो मौसम चक्र का खतरा अभी बरकरार है। यह मौसम चक्र लगातार मजबूत और ताकतवर होता जा रहा है। इससे आगामी समय में मानसून आंशिक रूप से प्रभावित हो सकता है।
जुलाई-अगस्त सर्वाधिक वर्षा वाला महीना होता है और इसमें ही खरीफ फसलों की सबसे ज्यादा बिजाई होती है। इसके रकबे की दृष्टि से भारत में फिलहाल स्थिति लगभग सामान्य है इसलिए गंभीर चिंता की बात नहीं है। यह सही है कि पिछले सप्ताह तक धान, तुवर, मूंग एवं मक्का का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से पीछे चल रहा था लेकिन क्षेत्रफल में गिरावट का स्तर ज्यादा बड़ा नहीं है। उम्मीद की जा रही है कि इस बार खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष तथा पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल के आसपास पहुंच सकता है।
भारत की तुलना में अन्य देशों पर अल नीनो मौसम चक्र का ज्यादा असर पड़ने की संभावना है। इसमें ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्व एशिया तथा भारतीय उप महाद्वीप के देश भी शामिल हैं। इससे खासकर धान (चावल), ऑयल आम, कोकोआ, गन्ना (चीनी) तथा कॉफी आदि के उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
यदि अल नीनो की मजबूती लम्बे समय तक बरकरार रही तो गेहूं के उत्पादन पर भी प्रभाव पड़ सकता है भारत सहित दक्षिण एशिया एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में चावल का अत्यन्त विशाल उत्पादन होता है।
अल नीनो की वजह से बारिश कम होने पर धान की फसल को खतरा पैदा हो सकता है। दिसम्बर तक अल नीनो का प्रभाव बढ़ता जाएगा और इसे पूरी तरह खत्म होने में इसके बाद करीब पांच माह का समय लग सकता है। इससे कई देशों में कृषि उत्पादन प्रभावित होगा।
